कृष्ण का बाल लीला: नंद बाबा की गोद में मधुर भोजन
भगवान कृष्ण के बाल लीला के किस्से हर युग में लोगों के दिलों को छूते आए हैं। उनका बचपन गोकुल की मिट्टी, गायों की मुरादें और नंद बाबा की ममता से भरा था। जब भी कृष्ण भोजन करते, तो वह सिर्फ एक आहार नहीं, बल्कि प्रेम का अनूठा दृश्य बन जाता था।
कहा जाता है कि छोटे कान्हा खाते समय नंद बाबा की गोद में बैठते थे। नंद बाबा, जो गोकुल के आदरणीय ग्वाल और कृष्ण के पालक पिता थे, उनके चेहरे पर प्रेम और गरिमा का संगम होता था। कृष्ण अपने नन्हे हाथों से उठा-उठाकर खाना खाते थे, और हर बार जब वह अपना हाथ बढ़ाते, तो नंद बाबा की आँखों में चमक आ जाती।
इस सरल दृश्य में छिपा है एक गहरा संदेश—प्रेम की परवाह, माता-पिता का आशीर्वाद और बचपन की मासूमियत। भोजन तो सिर्फ भोजन होता, लेकिन नंद बाबा की गोद में बैठकर खाने का एहसास कृष्ण के लिए प्रेम का अमृत था।
आज भी घर-घर में जब बच्चे अपने माता-पिता के पा
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