सुबह की प्रार्थना: एक शांत शुरुआत
सुबह की प्रार्थना दिन की सबसे सुंदर शुरुआत हो सकती है। जब सूरज की पहली किरणें धरती को छूती हैं, तो उस पल में एक अद्भुत शांति छुपी होती है। यही वह समय है जब दिल और दिमाग दोनों शांत होते हैं।
प्रार्थना का कोई नियम नहीं होता। आप बैठकर, खड़े होकर, या अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे भी प्रार्थना कर सकते हैं। कोई जरूरी नहीं कि आप मंदिर या मस्जिद जाएं, न ही यह कि आपके पास खास शब्द हों। कभी-कभी चुपचाप बैठना और दिल में अपनी बात कहना ही काफी होता है।बस अपनी आँखें बंद कर लीजिए। गहरी सांस लीजिए और कल्पना करिए कि वह आपके पास है – आप जिस देवता या ऊर्जा में विश्वास करते हैं। आप धन्यवाद दे सकते हैं, मदद मांग सकते हैं, या बस उसके साथ एक पल बिता सकते हैं।
सच्ची प्रार्थना दिल से आती है, जुबान से नहीं। चाहे आप हिंदू, मुस्लिम, सिख या किसी भी संप्रदाय से हों, भावनाएं सबकी एक जैसी होती हैं। एक छोटी सी प्रार्थना आपके दिन में आशा,
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