कर्ण का अंतिम सवाल: एक माँ के प्यार की तड़प

महाभारत के क्रूर युद्ध में, जब कर्ण धरती पर लहूलुहान पड़े थे, उनकी आँखों में न तो डर था, न घृणा। बल्कि एक गहरा सवाल था, जो सदियों तक दिल छू जाता है। उन्होंने श्रीकृष्ण से पूछा—"मेरी माँ ने मुझे जन्मते ही त्याग दिया, क्या ये मेरा अपराध था कि मेरा जन्म एक अवैध बच्चे के रूप में हुआ?"

यह सवाल केवल एक प्रश्न नहीं, बल्कि एक टूटे हुए दिल की चीख थी। कर्ण, जो वीरता, दानवीरता और निष्ठा के प्रतीक थे, पूरे जीवन एक अस्वीकृति के दर्द के साथ जिए। कुंती ने उन्हें जन्म दिया, लेकिन लोकलाज के डर से त्याग दिया। वह अपनी माँ के प्यार का हिस्सा बन नहीं पाए।

कृष्ण ने उनकी बात सुनी, लेकिन जवाब में कुछ नहीं कहा—शायद क्योंकि कोई जवाब उस दर्द को नहीं भर सकता था। कर्ण का सवाल आज भी प्रासंगिक है। यह हमें याद दिलाता है कि एक बच्चा किसी भी परिस्थिति में पापी नहीं होता। उसका जन्म उसके अपराध का कारण नहीं बनना चाहिए।

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