गंगा ने क्यों हंसी अर्जुन की मृत्यु पर?
अर्जुन की मृत्यु पर गंगा का हंसना कोई निर्दयता नहीं, बल्कि एक गहरे दर्द की प्रतिक्रिया थी। जब भीमसेन ने गंगा से पूछा कि अर्जुन मर गया तो आप हंसी क्यों, तो गंगा ने कहा — "मैं भी एक माँ हूँ। मैंने भी अपने पुत्र के लिए ऐसे ही आँसू बहाए थे।"
गंगा के बेटे थे भीष्म — जिन्हें वह जन्म देकर तुरंत त्याग गईं। भीष्म के दर्द में उनका दिल टूट चुका था। अर्जुन की मृत्यु उन्हें उसी दुख की याद दिला गई, जिसे वह सदा अपने हृदय में दबाए रहीं।
लेकिन यहाँ एक रहस्य भी था। अर्जुन का वध तो बभ्रुवाहन ने किया, लेकिन उस बाण की शक्ति का स्रोत थीं कामाख्या देवी, जिन्हें स्वयं गंगा ने आशीर्वाद दिया था। इसलिए गंगा कहती हैं — "वह बाण, जिससे अर्जुन का सिर धड़ से अलग हुआ, मेरे ही आशीर्वाद से साकार हुआ।"
हंसी दर्द की चोट थी। गंगा नहीं रोईं, क्योंकि देवी होने के बावजूद उनके पास रोने का अधिकार भी सदा नहीं र
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