दानवीर कर्ण का अंतिम दान: सोने के दांतों की कथा
महाभारत काल के सबसे उदार और साहसी योद्धाओं में से एक माने जाते हैं दानवीर कर्ण। उनकी दानशीलता की कहानियाँ आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। कर्ण ने कभी भी किसी दान माँगने वाले को खाली हाथ नहीं लौटाया, चाहे उसकी कीमत अपने जीवन की ही क्यों न हो।
उनका अंतिम दान उनकी इसी दानवीरता की सबसे बड़ी मिसाल है। कथा के अनुसार, जब कर्ण का अंतिम समय निकट आया, तो भगवान कृष्ण ने उनकी परीक्षा लेने के लिए एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और उनसे दान माँगा। कर्ण के पास तब कुछ नहीं था, लेकिन वह दान न देना नहीं जानते थे। ऐसे में उन्होंने अपने मुँह से सोने के दांत तोड़कर भगवान कृष्ण को अर्पण कर दिए।
इस अटूट त्याग और निस्वार्थता से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान देने के लिए कहा।कर्ण का यह दान उनके चरित्र की गहराई और त्याग की भावना को दर्शाता है। वे न सिर्फ एक महान योद्धा थे, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति भी
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