महात्मा गांधी ने व्रत को कैसे देखा?

महात्मा गांधी ने व्रत को न केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में देखा, बल्कि इसे सामाजिक बदलाव और अपने सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का माध्यम भी माना। उन्होंने अपने जीवन में कई बार व्रत रखे, लेकिन सबसे प्रसिद्ध था हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए 21 दिन का व्रत

यह व्रत उन्होंने 1924 में किया था, जब देश भर में सांप्रदायिक तनाव चरम पर था। उनका उद्देश्य था कि दोनों समुदायों के बीच शांति और भाईचारा स्थापित किया जा सके। उनके इस तपस्या भरे कदम ने पूरे राष्ट्र का ध्यान खींचा और लाखों लोगों के हृदय में सद्भाव का बीज बोया।

गांधी जी के लिए व्रत केवल भोजन न करना नहीं था। यह आत्म-नियंत्रण, प्रार्थना, चिंतन और आत्म-सुधार का साधन था। वे मानते थे कि व्रत से मन शांत होता है और वचन शक्ति मजबूत होती है।

हालांकि उन्होंने कई व्रत रखे, लेकिन 21 दिन का यह व्रत विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह राष्ट्रीय एकता के लिए समर्प

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