भारत में राष्ट्रवाद की शुरुआत
भारत में राष्ट्रवाद की भावना का उदय 19वीं शताब्दी में धीरे-धीरे शुरू हुआ। यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया थी, जिसके पीछे ब्रिटिश शासन की नीतियों का बहुत बड़ा हाथ था। अंग्रेजों ने भारत में अपने प्रशासन, शिक्षा और कानून के माध्यम से एक नई सोच को जन्म दिया।
इससे पहले भारत में राज्य, धर्म और संस्कृति के आधार पर अलग-अलग पहचान थीं, लेकिन ब्रिटिश शासन ने पूरे देश को एक इकाई के रूप में प्रबंधित करना शुरू किया। इसी के साथ लोगों के मन में यह भावना जागी कि वे सिर्फ एक क्षेत्र या समुदाय के नहीं, बल्कि एक बड़े राष्ट्र के नागरिक हैं।
शिक्षा का भी बड़ा योगदान रहा।अंग्रेजी शिक्षा से भारतीय युवा पश्चिमी विचारों—जैसे स्वतंत्रता, समानता और राष्ट्रीयता—से परिचित हुए। इन विचारों ने उन्हें अपने देश के प्रति गहरी जिम्मेदारी महसूस कराई। धीरे-धीरे इन्हीं भावनाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन का आधार बनाया।
इस तरह, भार
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