दांडी मार्च: सविनय अवज्ञा की प्रतीक यात्रा

12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने दांडी मार्च की शुरुआत की थी, जिसे आज नमक मार्च या दांडी सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है। यह आंदोलन सविनय अवज्ञा आंदोलन की आधारशिला था। अंग्रेज सरकार ने नमक पर कर लगा रखा था, जिसे गांधी जी ने अन्यायपूर्ण माना। उन्होंने इसके खिलाफ एक शांतिपूर्ण यात्रा की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से लेकर गुजरात के दांडी तट तक 240 मील की पैदल यात्रा तय की।

यह मार्च सिर्फ एक विरोध की यात्रा नहीं थी, बल्कि लाखों भारतीयों के लिए एक प्रेरणा बन गई। गांधी जी ने समुद्र तट पर पहुंचकर नमक बनाकर कानून की अवज्ञा की और लाखों लोगों ने उनका साथ दिया। इस आंदोलन ने अंग्रेजी शासन को चुनौती देने का नया रास्ता दिखाया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन का यह दूसरा नाम – दांडी मार्च – भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। यह शक्ति के खिलाफ अहिंसा की

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