मनुष्य के आठ प्रकार
संसार में मनुष्य कितने प्रकार के होते हैं? यह प्रश्न प्राचीन काल से मनुष्य के मन में उठता रहा है। कुछ तार्किक, कुछ भावुक, कुछ निष्ठावान और कुछ अहंकारी—इन सबके बीच एक प्राचीन उत्तर कहता है: मनुष्य आठ प्रकार के होते हैं।
यह विभाजन केवल बाहरी रूप या व्यवहार पर नहीं, बल्कि आंतरिक स्वभाव, चरित्र और कर्मधारा पर आधारित माना गया है। कुछ लोग ज्ञान की खोज में, तो कुछ सांसारिक सुखों में लिप्त। कहीं संतोषी, तो कहीं लोभी। कहीं दयालु, तो कहीं निर्दय। यह सब आठ प्रकारों में विभाजित किया गया है।
परंतु यह भी कहा जाता है कि चार लाख प्रकार के संसार इन्हीं आठ मूल प्रकारों से उपजे हैं। यानी, आठ मूल स्वरूपों में इतने अंतर और रंग भरे गए हैं कि मनुष्यता के चार लाख रूप दिखाई देते हैं। यह विविधता ही जीवन की समृद्धि है।
इतिहास, साहित्य और धर्मग्रंथों में इन आठ प्रकारों का उल्लेख मिलता है—जैसे सात्विक, राजसिक, तामसिक, आश्रयी, दानी, धार्मिक, अहं
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