गांधीजी के अनुसार ब्रह्मचारी कौन?

महात्मा गांधी के लिए ब्रह्मचर्य केवल शारीरिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जीवन का एक ऊँचा स्तर था। उनके अनुसार ब्रह्मचारी वह नहीं है जो सिर्फ व्रत लेकर भोजन या निकटता से बचता है। बल्कि, वास्तविक ब्रह्मचारी वह है जिसने अपने मन, इंद्रियों और वीर्य पर पूर्ण नियंत्रण पा लिया हो।

गांधीजी मानते थे कि जो व्यक्ति कामेच्छा से परे हो गया है, जिसका ईश्वर के प्रति इतना दृढ़ विश्वास हो कि वह चेतन और अचेतन रूप से होने वाले वीर्यपात पर भी विजय पा चुका हो, वही सच्चा ब्रह्मचारी है। उनके अनुसार, ऐसा व्यक्ति किसी भी नग्न महिला के साथ, चाहे वह कितनी भी सुंदर क्यों न हो, बिना मन में उत्तेजना लिए नंगे शरीर के साथ सो सकता है।

यह एक कठोर मानक है, लेकिन गांधीजी इसे आत्म-नियंत्रण, आत्म-जीत और आध्यात्मिक शक्ति की सीमा के रूप में देखते थे। उनके लिए ब्रह्मचर्य केवल नियम नहीं था, बल्कि एक ऐसी स्थिति

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