महात्मा गांधी के प्रेरक विचार और संघर्ष की प्रेरणा

महात्मा गांधी के नारे सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए जागृति की पुकार थे। जब देश अंग्रेजी शासन के खिलाफ खड़ा हो रहा था, उस समय गांधीजी ने एक ऐतिहासिक आह्वान किया – “भारत छोड़ो”। यह नारा सिर्फ आजादी की मांग नहीं था, बल्कि एक नैतिक जागृति की प्रतिज्ञा था।

उन्होंने जिस तरह के संघर्ष को गले लगाया, उसमें एक अनूठा साहस था। उनका नारा “करो या मरो” उस दृढ़ता को दर्शाता था, जिसमें पीछे हटने का विकल्प नहीं था। लेकिन गांधीजी क्रांति सिर्फ राजनीतिक नहीं, आध्यात्मिक भी थी। इसीलिए वे कहते थे – “आँख के बदले आँख में पूरी दुनिया अंधी हो जाएगी”। यह वाक्य उनके अहिंसा के सिद्धांत की आत्मा थी।

वे सिर्फ राजनीति में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी प्रेरक थे। उनका यह विचार कि “कानों का दुरुपयोग मन को दूषित और अशांत करता है”, आज के व्यस्त और विचलित युग

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय