गांधी जी को क्या पसंद नहीं था?

महात्मा गांधी के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण बात थी – श्रम की पूजा। वह शारीरिक श्रम को आत्मशुद्धि का साधन मानते थे। उन्हें यह बात बिलकुल पसंद नहीं थी कि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्षम होते हुए भी श्रम से दूर रहे, चाहे वह उम्र के कारण हो या दर्जे की वजह से।

गांधी जी कहते थे कि जब तक शरीर पूरी तरह लाचार न हो जाए, तब तक हर इंसान को अपना दैनिक शारीरिक काम स्वयं करना चाहिए। उनके लिए 'महात्मा' या 'बूढ़े' होने का तमगा यह नहीं था कि वे काम से बचें। उल्टा, वह तकरीबन 78 साल की उम्र तक अपने कपड़े खुद बुनते थे, अपना काम खुद करते थे और थकान को नजरअंदाज करते थे।

उनमें काम करने की अद्भुत ऊर्जा थी। चाहे चरखा चलाना हो, सफाई करना हो या आश्रम के लिए लकड़ियां बीनना, गांधी जी हर काम में बराबर की भागीदारी करते थे। उनका मानना था कि श्रम से ही आत्मसंतुष्टि और सच्ची सेवा संभव है।

आज जब हम आराम को सुख मानते हैं, गांधी जी का यह संदेश हम

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