गांधीजी की पहली माफी की चिट्ठी
महात्मा गांधी के बचपन की एक छोटी सी घटना उनके चरित्र को झलकाने के लिए काफी है। जब वे छोटे थे, तब उनके भाई ने 25 रुपये का कर्ज ले लिया था। उसे चुकाने के लिए भाई ने अपने हाथ के सोने के कड़े से एक तोला सोना काट दिया।
लेकिन यह बात जब गांधीजी को पता चली, तो उन्हें गहरा दुख हुआ। उन्हें लगा कि झूठ और चोरी के रास्ते कर्ज चुकाना ठीक नहीं है। वे पिता के सामने जाकर माफी मांगना चाहते थे, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाए। उनके सामने खड़े होकर क्षमा मांगने का साहस नहीं था।
फिर क्या किया? उन्होंने एक पत्र लिखा। उस पत्र में पूरी घटना बताई, अपनी भूल स्वीकार की और पिता से ईमानदारी से माफी मांगी। यह छोटी सी कदम उनके जीवन में सच्चाई और अहिंसा के मार्ग की ओर पहला कदम साबित हुआ।
बाद में गांधीजी ने कहा था कि उस दिन की माफी मांगने की चिट्ठी उनके लिए एक बड़ा सबक था। यह उस जीवन की ओर पहला कदम था, जिसमें गलती को छिपाने के बजाय स्व
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