गांधी की वकीलों को फटकार: न्याय के नाम पर शोषण नहीं

महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण में गरीब बटाईदार किसानों के संघर्ष के दौरान वकीलों को कड़ी फटकार लगाई थी।

उस समय कई वकील इन निर्धन किसानों से मुकदमे के नाम पर भारी फीस वसूल रहे थे, जबकि अदालती प्रक्रिया लंबी और जटिल थी। गांधी ने महसूस किया कि ऐसे मामलों को अदालत तक ले जाने से किसानों को वास्तविक राहत नहीं मिल रही थी। बल्कि, वे डरे-सहमे रहते थे — जमींदारों से, प्रणाली से और न्याय के नाम पर हो रहे शोषण से।

गांधी का मानना था कि सच्चा न्याय तभी मिल सकता है जब किसान डर से मुक्त हों। उनके लिए कानूनी लड़ाई से ज्यादा जरूरी था आत्मसम्मान और साहस। उन्होंने वकीलों से कहा कि अगर वे वाकई किसानों की मदद करना चाहते हैं, तो फीस छोड़ दें और सच्चे उद्देश्य से आंदोलन में शामिल हों।

इस घटना ने न केवल चंपारण आंदोलन को नैतिक मजबूती दी, बल्कि गांधी के अहिंसक प्रतिरोध और जनता के साथ सीधे जुड़ाव के सिद्धांत को भी मजबूती दी। उनके लिए न्याय केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि डर के बंधन से मुक्ति था।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय