श्री कृष्ण के पुत्र और पुत्रियां: एक पौराणिक परिचय
सनातन धर्म और हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान श्री कृष्ण का चरित्र अत्यंत विराट और विस्मयकारी है। वे न केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ और मार्गदर्शक थे, बल्कि एक बड़े परिवार के मुखिया भी थे। अक्सर लोग उनके बाल रूप या महाभारत के उपदेशों के बारे में जानते हैं, लेकिन उनके पारिवारिक विस्तार की कहानी भी बेहद रोचक है।
पौराणिक ग्रंथों, विशेषकर भागवत पुराण और महाभारत के अनुसार, श्री कृष्ण की आठ पटरानियां (मुख्य पत्नियां) थीं, जिन्हें 'अष्टभार्या' कहा जाता है। इनके नाम रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिती, भद्रा और लक्ष्मणा थे। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि श्री कृष्ण की प्रत्येक पटरानी से उन्हें १० पुत्र रत्न प्राप्त हुए थे।
इस प्रकार, आठ पटरानियों से उनके कुल ८० पुत्र थे। इनमें माता रुक्मिणी के ज्येष्ठ पुत्र प्रद्युम्न सबसे प्रसिद्ध हैं, जिन्हें कामदेव का अवतार माना जाता है। प्रद्युम्न के अलावा साम्ब (माता जाम्बवती के पुत्र), चारुदेष्ण और भानु जैसे नाम भी प्रमुखता से लिए जाते हैं। पुत्रों के साथ-साथ श्री कृष्ण की कई पुत्रियों का भी उल्लेख मिलता है, जिनमें माता रुक्मिणी की पुत्री चारु प्रमुख थीं।
इसके अतिरिक्त, भौमासुर के कारागार से मुक्त कराई गई १६,००० अन्य महिलाओं को भी श्री कृष्ण ने सामाजिक सम्मान देने के लिए अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। द्वारका का यह विशाल यदुवंश इतिहास में अपनी भव्यता और प्रभाव के लिए जाना जाता है, जो अंततः गांधारी के श्राप और आपसी कलह के कारण समाप्त हो गया।
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