खाटू श्याम और रींगस: बर्बरीक की अद्भुत कथा

भगवान श्रीकृष्ण के वचन के अनुसार, कलयुग में बर्बरीक की पूजा श्याम स्वरूप में होगी। यही कारण है कि आज भी लाखों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए खाटू धाम पहुँचते हैं।

खाटू में स्थित श्याम मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहाँ बर्बरीक के मस्तक की पूजा होती है। मान्यता है कि युद्ध से पहले जब श्रीकृष्ण ने उनकी शक्ति का परीक्षण किया, तो बर्बरीक ने अपना सिर उनके चरणों में अर्पित कर दिया।

लेकिन कम लोग जानते हैं कि इसी क्षेत्र में, रींगस में उनके धड़ की पूजा होती है। यह स्थान भी उतना ही पवित्र है और भक्तों के बीच गहरी आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि बर्बरीक के धड़ से निकला रक्त ही रींगस की भूमि पर गिरा था, जिसके बाद वहाँ उनके धड़ की स्थापना हुई।

आज भी दोनों स्थानों—खाटू और रींगस—के बीच एक गहरा आध्यात्मिक संबंध माना जाता है। श्रद्धालु पूर्ण विश्वास के साथ कहते हैं कि जो व्यक्ति खाटू श्या

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