अंग्रेजों को कैसे मिला मुंबई?

आज जिस मुंबई को हम भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में जानते हैं, उसका इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि मुंबई कभी सात छोटे द्वीपों का एक समूह हुआ करती थी। 16वीं शताब्दी में, यानी साल 1534 के आसपास, पुर्तगालियों ने गुजरात के शासक बहादुर शाह को हराकर इन द्वीपों पर अपना नियंत्रण जमा लिया था। इसके बाद कई दशकों तक इस इलाके पर पुर्तगाल का शासन रहा।

लेकिन 17वीं सदी में एक अनोखी ऐतिहासिक घटना ने मुंबई की किस्मत बदल दी। साल 1661 में पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन दे ब्रेगांज़ा का विवाह इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय के साथ तय हुआ। इस शाही शादी के मौके पर पुर्तगाल ने अंग्रेजों के साथ मजबूत रिश्ते बनाने के लिए मुंबई द्वीप समूह को राजा चार्ल्स द्वितीय को दहेज के रूप में सौंप दिया।

अंग्रेजी हुकूमत के हाथ जब यह क्षेत्र आया, तो उन्होंने इसके भौगोलिक महत्व को तुरंत पहचान लिया। राजा चार्ल्स द्वितीय ने बाद में इस जमीन को ईस्ट इंडिया कंपनी को किराए पर दे दिया। धीरे-धीरे अंग्रेजों ने इन सात अलग-अलग द्वीपों को जोड़ने और विकसित करने का काम शुरू किया। जो मुंबई कभी दहेज में दी गई एक साधारण जगह थी, वही आगे चलकर ब्रिटिश साम्राज्य का सबसे बड़ा व्यापारिक और समुद्री केंद्र बन गई।

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