हीरोइन: एक जानलेवा नशे की शुरुआत

क्या आप जानते हैं कि आज जिसे हम खतरनाक नशा मानते हैं, वह हीरोइन कभी खांसी की दवा के रूप में इस्तेमाल होती थी? हाँ, यह सच है। 19वीं सदी के अंत में फार्मास्यूटिकल कंपनियों ने हीरोइन को एक शक्तिशाली खांसी निवारक के रूप में बाजार में उतारा था। इसका उपयोग ट्यूबरक्यूलोसिस और अन्य श्वसन रोगों में भी किया जाता था।

लेकिन जल्द ही पता चला कि यह दवा इतनी लत बन जाती है कि मरीज दिन-रात इसके सेवन के लिए बेचैन रहने लगे। हीरोइन मॉर्फिन से बनती है, जो अफीम से निकाला जाता है। शुरू में इसे सुरक्षित माना गया, लेकिन धीरे-धीरे यह एक खतरनाक नशे के रूप में उभरी।

क्या इंसान ने खुद इसकी खोज की? हाँ। लेकिन फिर उसके लालच और नियंत्रण की कमी ने इसे मानवता के लिए अभिशाप बना दिया। जहां एक तरफ इसका चिकित्सकीय उपयोग बंद हो गया, वहीं दूसरी तरफ यह अवैध तस्करी और गली-मोहल्लों में फैल गई।

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