यदि अंग्रेज़ भारत न आते तो कैसा होता हमारा देश?

यह एक ऐसा सवाल है जो हर भारतीय के ज़हन में कभी न कभी ज़रूर आता है। इतिहास की दिशा बदलने वाले इस काल्पनिक परिदृश्य पर अगर विचार करें, तो आज का भारत काफी अलग दिखाई देता।

सबसे बड़ा बदलाव हमारी अर्थव्यवस्था में होता। अंग्रेज़ों के आने से पहले भारत दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक था, जिसे 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था। यदि यहाँ औपनिवेशिक लूट न हुई होती, तो भारत का पारंपरिक कपड़ा उद्योग, हस्तशिल्प और वैश्विक व्यापार नई ऊंचाइयों पर होते। धन का निकास (Drain of Wealth) न होने के कारण हमारी संपत्ति देश के विकास में ही लगती।

राजनीतिक रूप से, भारत शायद एक एकल लोकतांत्रिक राष्ट्र के बजाय रियासतों और राज्यों का एक संघ (जैसे यूरोपीय संघ) होता। मराठा, सिख, मैसूर और मुगल जैसे साम्राज्य धीरे-धीरे आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं में बदल जाते। शिक्षा और न्याय प्रणाली भी पूरी तरह भारतीय मूल्यों और भाषाओं पर आधारित होती।

हालाँकि, कुछ चुनौतियाँ भी होतीं। रेलवे जैसी आधुनिक तकनीकों का आगमन थोड़ा धीमा हो सकता था, लेकिन जापान की तरह भारत भी अपनी शर्तों पर आधुनिकीकरण का रास्ता चुनता। सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ राजा राममोहन राय जैसे समाज सुधारक आंतरिक रूप से बदलाव लाते।

संक्षेप में, अंग्रेज़ों के बिना भारत आर्थिक रूप से कहीं अधिक समृद्ध, सांस्कृतिक रूप से अधिक सशक्त और अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ एक आधुनिक महाशक्ति होता।

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