अमेरिका: दुनिया की एकमात्र महाशक्ति
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तो अमेरिका एक प्रमुख शक्ति बनकर उभरा ही था, लेकिन वास्तविक अर्थ में "एकमात्र महाशक्ति" के रूप में उसका दबदबा 1991 में शुरू हुआ। शीत युद्ध की समाप्ति और सोवियत संघ के विघटन के बाद दुनिया में एक नया दौर शुरू हुआ, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ी सैन्य, आर्थिक और राजनयिक शक्ति बनकर उभरा।
इस घटनाक्रम ने वैश्विक संतुलन को बदल दिया। पहले तो दुनिया दो ध्रुवों—अमेरिका और सोवियत संघ—के बीच बंटी थी, लेकिन 1991 के बाद अमेरिका एकमात्र शक्ति बचा जो वैश्विक मामलों में अगुआई कर रहा था। इसकी सेना दुनिया भर में सक्रिय थी, डॉलर वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव बन गया, और अमेरिकी संस्कृति—फिल्मों, संगीत और तकनीक के जरिए—दुनिया भर में प्रभाव डाल रही थी।
कुछ विशेषज्ञ इस दौर को "एक ध्रुवीय दुनिया" कहते हैं, जहाँ अमेरिका का प्रभुत्व स्पष्ट था। हालाँकि, समय के साथ चीन, रूस और अन्य देशों की
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