अरब में इस्लाम का उदय और 'हिजरा' की ऐतिहासिक यात्रा
इतिहास के पन्नों में सन् 622 का वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान अरब प्रायद्वीप में इस्लाम के इतिहास का एक नया अध्याय लिखा गया। इस समय पैगम्बर मुहम्मद को कुछ विरोध और परिस्थितियों के चलते अपने अनुयायियों के साथ मक्का छोड़कर मदीना की ओर कूच करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
पैगम्बर मुहम्मद की इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायक यात्रा को इस्लाम में 'हिजरा' के नाम से जाना जाता है। इस घटना ने न केवल उनके जीवन की दिशा को बदला, बल्कि अरब समाज और पूरी दुनिया के इतिहास पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा। मदीना पहुँचने के बाद से ही इस्लामिक समुदाय को एक मजबूत संगठनात्मक आधार मिला।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से इस वर्ष का महत्व इस बात से भी है कि जिस वर्ष पैगम्बर मुहम्मद का मदीना में आगमन हुआ, उसी वर्ष से इस्लामिक कैलेंडर यानी 'हिजरी सन्' की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है। यह घटना इस्लाम के प्रसार और उसकी सांस्कृतिक पहचान स्थापित करने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुई।
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