इंसान के पांच सबसे बड़े शत्रु और उनसे बचाव का मार्ग
मानव जीवन में आंतरिक शांति और सच्चे सुख की राह में सबसे बड़ी बाधाएं हमारे भीतर मौजूद विकार ही होते हैं। हमारे ग्रंथों और मनीषियों के अनुसार काम, क्रोध, मद, लोभ और मोह - ये पांच चीजें इंसानियत की सबसे बड़ी दुश्मन हैं। जब तक व्यक्ति इन विकारों के प्रभाव में रहता है, तब तक उसका मन अशांत रहता है और वह सही और गलत का अंतर भूल जाता है।
काम वासना विवेक को नष्ट करती है और क्रोध बुद्धि को हर लेता है। मद यानी अहंकार मनुष्य को दूसरों से दूर कर देता है, जबकि लोभ की भूख कभी शांत नहीं होती। वहीं मोह व्यक्ति को सांसारिक बंधनों में बांधकर भ्रमित करता है। ये पांचों शत्रु धीरे-धीरे इंसान की संवेदनशीलता और अच्छाई को खत्म कर देते हैं।
इन आन्तरिक विकारों से बचने का सबसे सशक्त और सरल माध्यम सच्ची भक्ति और ईश्वर-स्मरण है। जब जीवन में भक्ति का प्रवेश होता है, तो मन से स्वार्थ और अहंकार समाप्त होने लगते हैं। भक्ति मनुष्य के दृष्टिकोण को व्यापक बनाती है, जिससे उसके भीतर सर्वभाव और प्रेम का संचार होता है। ऐसी स्थिति में इंसान के लिए पूरा ब्रह्मांड अपना हो जाता है और दुनिया में कोई भी पराया नहीं रहता।
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