भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते

भारत और चीन के आर्थिक संबंध आज के समय में दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक गठबंधनों में गिने जाते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसमें एक बहुत बड़ा असंतुलन भी देखने को मिलता है। साल 2021 के आंकड़ों पर नजर डालें तो अकेले उस साल चीन से भारत का आयात, चीन को किए जाने वाले कुल निर्यात के मुकाबले लगभग 70 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा था।

2000 के दशक की शुरुआत से जब दोनों देशों के बीच व्यापार ने रफ्तार पकड़ी, तब से लेकर अब तक चीन लगातार फायदे में रहा है। भारत के साथ व्यापार में चीन का यह अनुकूल संतुलन समय के साथ बढ़ता ही गया है। विभिन्न अनुमानों के अनुसार, चीन का भारत के साथ कुल संचयी व्यापार घाटा या आधिक्य (trade surplus) अब 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है।

यह स्थिति यह दिखाती है कि भारतीय बाजारों में चीनी सामानों की मांग काफी ज्यादा है, जबकि भारतीय उत्पादों की पहुंच उस अनुपात में चीन के बाजार तक नहीं हो पाती। इस भारी-भरकम व्यापार घाटे को कम करना और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाना भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक विषय बन चुका है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय