एक थाट से कितने राग बन सकते हैं?
भारतीय शास्त्रीय संगीत में थाट स्वरों का वह आधारभूत ढांचा है जिससे विभिन्न रागों का जन्म होता है। एक संपूर्ण थाट में क्रमानुसार सात स्वर—सा, रे, ग, म, प, ध, और नि—होते हैं। संगीत के विद्यार्थियों और प्रेमियों के बीच यह जिज्ञासा अक्सर बनी रहती है कि किसी एक थाट के भीतर कुल कितने राग उत्पन्न किए जा सकते हैं।
संगीत शास्त्र के जानकारों और गणितीय नियमों के अनुसार, किसी एक 'थाट' के सात स्वरों में आरोह और अवरोह के अलग-अलग संयोजनों से लगभग 484 राग तैयार किए जा सकते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि संगीत का एक अकेला थाट भी अपने भीतर अपार संगीतमय संभावनाएं समेटे होता है।
भारतीय संगीत की परंपराओं की बात करें तो उत्तर भारतीय (हिंदुस्तानी) संगीत पद्धति में कुल 32 थाटों का वर्णन मिलता है। हालांकि, व्यावहारिक रूप से इनमें से प्रमुख 10 थाटों (जैसे कल्याण, बिलावल, भैरव आदि) का ही सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। दूसरी ओर, दक्षिण भारतीय (कर्नाटक) संगीत परंपरा में 72 थाट (मेलकर्ता) माने जाते हैं। थाट और रागों का यह अनूठा गणितीय व कलात्मक तालमेल ही हमारे शास्त्रीय संगीत को इतना समृद्ध और विविधतापूर्ण बनाता है।
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