काला पानी की सजा क्या है?

काला पानी की सजा का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। अंग्रेजों के जमाने में, जो कैदी बहुत खतरनाक या विद्रोही माने जाते थे, उन्हें सेल्युलर जेल में भेजा जाता था। यह जेल अंडमान और निकोबार द्वीप पर बनी हुई है, जहाँ चारों तरफ समुद्र का पानी है।

इस जेल के चारों ओर पानी का घेरा होने के कारण ही इस सजा को "काला पानी" कहा जाने लगा। यहाँ पर कैदी को लगभग हर तरह की सुविधा से वंचित रखा जाता था। घने जंगल, कठोर जलवायु, और समुद्र के बीच इस जेल में रहना बेहद कठिन था।

काला पानी की सजा सिर्फ शारीरिक पीड़ा नहीं थी, बल्कि मानसिक टूटन का भी एक तरीका थी। कैदियों को घंटों तक अकेले में बंद रखा जाता था। यहाँ के प्रसिद्ध कैदी में वीर सावरकर भी शामिल हैं, जिन्हें यहाँ कठोर परिस्थितियों में रखा गया था।

आज यह जेल सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है। काला पानी की सजा अब नहीं दी जाती, लेकिन

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