मांडू का इतिहास और इसका गौरवशाली अतीत
भारत के मध्य प्रदेश में स्थित मांडू एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक शहर है। अपनी बेहतरीन वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध यह शहर सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो माना जाता है कि मांडू की स्थापना छठी शताब्दी में मुंजादेव नामक एक प्रतापी राजा ने की थी।
शुरुआती दौर में यह शहर परमार वंश के राजपूत राजाओं के अधीन रहा। परमार शासकों ने इसे अपनी शक्ति और कला का केंद्र बनाया। मांडू की मजबूत किलेबंदी और पहाड़ियों से घिरी भौगोलिक स्थिति ने इसे एक सुरक्षित और महत्वपूर्ण गढ़ बना दिया था। हालांकि, समय बदला और 14वीं शताब्दी की शुरुआत में मुस्लिम आक्रमणकारियों ने परमारों को हराकर इस ऐतिहासिक क्षेत्र पर अपना अधिकार कर लिया।
इसके बाद के काल में मांडू सल्तनत काल और फिर मुगलों के शासन का गवाह बना। मांडू की हवाओं में आज भी रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी अमर है। यहाँ का जहाज महल, हिंडोला महल और विशाल दरवाजे आज भी पर्यटकों को इसके समृद्ध और स्वर्णिम अतीत की याद दिलाते हैं।
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