रानी रूपमती और बाज बहादुर की अमर प्रेम कहानी

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित सारंगपुर कस्बा एक ऐसी गाथा का गवाह है, जो इतिहास के पन्नों में अमर प्रेम के प्रतीक के रूप में दर्ज है। यह कहानी है मालवा के अंतिम स्वतंत्र सुल्तान बाजबहादुर और अपनी सुरीली आवाज़ व सुंदरता के लिए प्रसिद्ध रानी रूपमती की। दोनों का मिलन संगीत और कला के प्रति गहरे लगाव से हुआ था, जिसने उनके रिश्ते को बेहद खास बना दिया।

जब मुग़ल सम्राट अकबर की सेना ने मालवा पर आक्रमण किया, तो बाजबहादुर की सेना को हार का सामना करना पड़ा। अकबर की फ़ौज रानी रूपमती को अपने साथ ले जाने के इरादे से आगे बढ़ी। लेकिन रानी ने अपने स्वाभिमान और प्रेम की रक्षा करते हुए ज़हर खाकर अपनी जान दे दी। इस दुखद घटना की खबर मिलने पर बाज बहादुर टूट गए और उन्होंने रानी के मकबरे पर सिर पटककर अपने प्राण त्याग दिए।

सारंगपुर स्थित यह ऐतिहासिक मकबरा आज भी इस अमर प्रेमी जोड़े की वफ़ादारी और बलिदान की याद दिलाता है।

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