अंग्रेज और भारत में चाय की शुरुआत
नहीं, अंग्रेजों ने भारत से चाय नहीं ली — बल्कि उन्होंने भारत में चाय की खेती शुरू की। 1824 में, अंग्रेजों ने बर्मा और असम के बीच के पहाड़ी इलाकों में जंगली चाय के पौधे खोजे। इस खोज के बाद, उन्होंने भारत में चाय की वाणिज्यिक खेती की शुरुआत की। 1836 में असम में पहला चाय बागान स्थापित हुआ।
धीरे-धीरे, यह उद्योग फैला। दार्जिलिंग, नागालैंड और बांग्लादेश के आसपास के क्षेत्रों में भी चाय के बाग लगाए गए। अंग्रेजों को चाय यूरोप में बहुत पसंद थी, लेकिन पहले वे चीन से इसे मंगवाते थे। भारत में उत्पादन शुरू करने से उन्हें चीन पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।
1867 में, श्रीलंका (तब सीलोन) में भी चाय की खेती की शुरुआत हुई। यहीं से दुनिया भर में "सीलोन टी" की प्रसिद्धि आई।
आज, असम और दार्जिलिंग की चाय दुनिया भर में मशहूर है। हालांकि यह सब अंग्रेजों के व्यापारिक फैसले से शुरू हुआ, लेकिन भारतीय किसानों ने इसे अपना
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