क्या भगवान पहले एक स्त्री थीं?
इतिहास के गहरे पन्नों में छिपे कुछ सच आज भी हमें चौंका देते हैं। क्या आप जानते हैं कि मानव जीवन के पहले 200,000 साल तक भगवान की छवि एक महिला के रूप में थी? पुरातत्वविदों के मुताबिक, प्राचीन समाज में जीवन की सृजनात्मक शक्ति को स्त्री में देखा जाता था।
उस ज़माने में पृथ्वी को एक माँ माना जाता था—एक ऐसी शक्ति जो सबका पालन-पोषण करती है। इसलिए देवी को प्रकृति, उर्वरता और जीवन का प्रतीक माना गया। छोटी-छोटी मिट्टी की मूर्तियाँ, जिनमें महिलाओं के फले-फूले शरीर थे, पूजा के स्थानों पर मिली हैं। ये मूर्तियाँ उस विश्वास को दर्शाती हैं कि दुनिया की शुरुआत एक स्त्री के रूप में हुई थी।
लेकिन समय बदला। पुरुष-प्रधान समाज उभरा, और धीरे-धीरे भगवान की छवि पुरुष के रूप में बनने लगी। विभिन्न संस्कृतियों में एक-एक कर देवताओं ने स्थान ले लिया। फिर भी, कई संस्कृतियों में माँ दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती और अन्य देवियों की पूजा आज
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