क्या भगवान हमें देख रहे हैं?
हाँ, भगवान हमें हमेशा देख रहे हैं — लेकिन न तो आँखों से, न दूर से। वे हमारे अंदर, हमारे आसपास, हर कण में मौजूद हैं। बस हम उन्हें देख नहीं पाते। ऐसा लगता है जैसे हवा में पानी के कण हों, जिन्हें नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता, लेकिन जब धूप में वे चमकते हैं, तो दिखाई देने लगते हैं।
ठीक उसी तरह, जब हम ध्यान लगाते हैं, भक्ति में डूबते हैं या तपस्या करते हैं, तो हमारा मन शुद्ध होता है। उस शुद्धता में भगवान के दर्शन हो जाते हैं। ये कोई चमत्कार नहीं, बल्कि आत्मा की गहराई में उतरने का नतीजा है।
लेकिन एक शर्त है — हमें अपनी बुराइयों को छोड़ना होगा। क्रोध, लोभ, अहंकार — ये सब परदे की तरह हैं, जो भगवान को ढक लेते हैं। जैसे गंदे पानी में नमक के कण नहीं दिखते, वैसे ही अशुद्ध मन में ईश्वर भी नहीं झलकते।
इसलिए याद रखें: भगवान दूर नहीं हैं। वे तो हमारे भीतर ही बसे हैं। बस एक साफ दिल, एक शांत मन और
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