भारत और चीन: मित्रता की संभावना कहाँ तक?
कल्पना कीजिए, अगर भारत और चीन सच्चे साथी होते—एक दूसरे पर भरोसा करते, सीमा विवाद भुला बैठते, और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देते। एशिया आज शायद दुनिया का सबसे ताकतवर और आर्थिक रूप से समृद्ध क्षेत्र होता। दोनों देश मिलकर न केवल अपने क्षेत्र में शांति का वातावरण बना पाते, बल्कि पूरी दुनिया पर एक सकारात्मक प्रभाव डाल पाते।
लेकिन वास्तविकता अलग है। आज भी सीमा पर तनाव बना हुआ है। दोनों तरफ सैन्य तैनाती है, राजनयिक बातचीत धीमी, और व्यापार में अवरोध। चीन का पाकिस्तान के साथ नजदीकी संबंध, भारत के विरोध में बौद्ध नेताओं को आश्रय देना, और अरुणाचल को अपना हिस्सा बताना—ये सब समस्याओं के कारण हैं।
निकट भविष्य में दोस्ती की संभावना कम है।लेकिन यह मतलब यह नहीं कि कोई सहयोग नहीं हो सकता। दोनों देश ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन और अन्य मंचों पर बैठते हैं। कभी-कभी व्यापार बढ़ता भी है। लेकिन विश्वास की कमी गहरी
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