क्या भारत कभी दुनिया का सबसे अमीर देश था?

इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह सवाल अक्सर सामने आता है कि क्या भारत कभी सचमुच एक अमीर देश था। इसका जवाब चौंकाने वाला और गौरवशाली है। पहली से अठारहवीं शताब्दी के बीच के लंबे समय में भारतीय उपमहाद्वीप दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था। इस दौरान दुनिया के किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में यहाँ की आर्थिक स्थिति सबसे मजबूत थी।

हालाँकि, शुरुआती दौर की आर्थिक स्थिति को आज के मानकों से थोड़ा अलग तरह से समझना होगा। सन् 1000 ईस्वी तक भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से एक निर्वाह अर्थव्यवस्था (subsistence economy) थी, जहाँ प्रति व्यक्ति जीडीपी (GDP) जीवनयापन के स्तर से बस थोड़ी ही ऊपर थी। इतिहासकारों के अनुसार, पहली से लेकर एक हजार ईस्वी के बीच जीडीपी में कोई खास बड़ी वृद्धि दर्ज नहीं की गई थी, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन और संसाधनों के मामले में इसकी स्थिति वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर बनी हुई थी।

समय के साथ व्यापार, कृषि और हस्तशिल्प के दम पर भारतीय उपमहाद्वीप ने वैश्विक व्यापार में अपनी गहरी पैठ बनाई। मसाले, सूती वस्त्र और कीमती पत्थरों की पूरी दुनिया में भारी मांग हुआ करती थी, जिसके कारण इसे 'सोने की चिड़िया' भी कहा जाता था। यह अतीत का वह सच है जो भारत के समृद्ध और गौरवशाली आर्थिक इतिहास की गवाही देता है।

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