क्या भारत अर्थव्यवस्था के मामले में चीन की बराबरी कर सकता है?

आज कई भारतीयों के मन में यह सवाल उठता है कि चीन आर्थिक दौड़ में भारत से इतना आगे कैसे निकल गया। अगर हम इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें, तो स्थिति हमेशा ऐसी नहीं थी। साल 1979 में चीन और भारत की आर्थिक स्थिति लगभग एक जैसी ही थी। उस समय चीन की जीडीपी लगभग 178.28 बिलियन डॉलर थी, जबकि भारत की जीडीपी 152.99 बिलियन डॉलर के करीब थी। दोनों देशों के बीच कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं था।

लेकिन 1979 के बाद से परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। इसकी मुख्य वजह थी चीन के नेता देंग शियाओपिंग द्वारा शुरू किए गए बड़े आर्थिक सुधार। उन्होंने निजीकरण और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया, जिसने चीन के विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को रातों-रात बदल दिया। चीन दुनिया की फैक्ट्री बन गया और उसने तेजी से बुनियादी ढांचे में निवेश किया।

हालांकि, भारत भी अब पीछे नहीं है। पिछले कुछ दशकों में भारत ने सेवा क्षेत्र (Service Sector), तकनीक और डिजिटल क्रांति में अभूतपूर्व प्रगति की है। भारत के पास युवा आबादी का बहुत बड़ा फायदा है, जो आने वाले समय में देश के विकास को गति दे सकती है। निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और आर्थिक नीतियों को आसान बनाने से भारत भी इस अंतर को तेजी से कम करने की क्षमता रखता है।

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