हैदराबाद में मुस्लिम समुदाय की आर्थिक स्थिति
जब भी हैदराबाद का नाम आता है, लोगों के मन में नवाबी दौर, खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतें और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की तस्वीरें उभरती हैं। इसी वजह से एक आम धारणा यह बन गई है कि हैदराबाद के मुस्लिम बेहद अमीर और खुशहाल हैं। हालांकि, असल आर्थिक आंकड़े इस पुरानी धारणा से काफी अलग कहानी बयां करते हैं।
एक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, हैदराबाद महानगर क्षेत्र में केवल 2% से भी कम मुस्लिम आर्थिक रूप से कुलीन श्रेणी में आते हैं, जिनकी कुल संपत्ति 1 करोड़ रुपये से 100 करोड़ रुपये के बीच है। वहीं, लगभग 2 से 3% मुस्लिम उच्च वर्ग का हिस्सा हैं जिनकी वार्षिक आय 25 लाख रुपये या उससे अधिक है। मध्यम वर्ग की बात करें तो 10 से 15% आबादी ही 2 लाख से 5 लाख रुपये की सालाना कमाई कर पाती है।
इसकी तुलना में, शहर की मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। रिपोर्ट बताती है कि 63% मुस्लिम गरीबी रेखा के नीचे (BPL) जीवन बिताने को मजबूर हैं। ये परिवार मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूरी, सरकारी योजनाओं और सामाजिक सहायता पर निर्भर हैं। पुराना शहर (Old City) जैसे इलाकों में कई परिवार अनिश्चित रोजगार, कर्ज और कम आय के कारण अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। स्पष्ट है कि मुट्ठी भर अमीर परिवारों के अलावा हैदराबाद के बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय को बेहतर शिक्षा और स्थायी रोजगार की सख्त जरूरत है।
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