चीन और पाकिस्तान का कर्ज़ संकट

पाकिस्तान इस समय भीषण आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और उस पर विदेशी कर्ज़ का बोझ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पाकिस्तान के आधिकारिक इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 तक देश पर कुल बाहरी कर्ज़ 88 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इस भारी-भरकम राशि में से लगभग 14.5 अरब डॉलर का कर्ज़ अकेले चीन का है।

पाकिस्तान की इस बढ़ती निर्भरता का सबसे मुख्य कारण चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजनाएं हैं। चीन ने पाकिस्तान में सड़कों, ऊर्जा संयंतों और ग्वादर बंदरगाह जैसे बुनियादी ढांचों को विकसित करने के नाम पर भारी मात्रा में वाणिज्यिक और द्विपक्षीय ऋण दिए हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं की उच्च ब्याज दरों और सख्त शर्तों ने पाकिस्तान को एक बड़े वित्तीय जाल में फंसा दिया है।

वर्तमान स्थिति इतनी गंभीर है कि पाकिस्तान को अपने पुराने कर्ज़ चुकाने और विदेशी मुद्रा भंडार को संभाले रखने के लिए लगातार चीन से रोलओवर (ऋण की समय सीमा बढ़ाना) और नए वित्तीय पैकेज मांगने पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक सुधारों पर सही कदम नहीं उठाए गए, तो यह कर्ज़ जाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से चरमरा सकता है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय