पाकिस्तान पर चीनी कर्ज का गहराता बोझ
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों से गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है, और इसमें चीन का कर्ज एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। विभिन्न आर्थिक रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान का कुल विदेशी कर्ज 130 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। इसमें से अकेला चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता बना हुआ है, जिसके पास पाकिस्तान के कुल बाहरी कर्ज का लगभग 22 से 30 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 29 से 30 अरब डॉलर) है।
पाकिस्तानी मुद्रा में यह राशि 43 लाख करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। इस कर्ज का एक बड़ा हिस्सा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत बनी बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लिया गया था। CPEC को पाकिस्तान के विकास का जरिया माना गया था, लेकिन व्यावसायिक शर्तों पर लिए गए भारी ब्याज वाले वाणिज्यिक ऋणों ने देश की अर्थव्यवस्था पर वित्तीय दबाव बहुत बढ़ा दिया है।
विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की रिपोर्टों के मुताबिक, द्विपक्षीय विदेशी कर्ज के मामले में पाकिस्तान 70% से अधिक कर्ज के लिए अकेले चीन पर निर्भर है। पाकिस्तान को अब अपनी विदेशी मुद्रा भंडार को डूबने से बचाने और दिवालिया होने से बचने के लिए बार-बार चीनी बैंकों से कर्ज रोल-ओवर या नई मदद की गुहार लगानी पड़ती है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।