भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध तथा व्यापार घाटा

भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार हमेशा से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। भारतीय आंकड़ों के अनुसार, भारत ने चीन को लगभग 28.14 बिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया था, जिसमें 34.2 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया। हालांकि, इस सकारात्मक वृद्धि के बावजूद दोनों देशों के व्यापार संतुलन में एक बड़ी असमानता कायम है।

व्यापार में आयात और निर्यात के भारी अंतर के कारण वर्ष 2021 में भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 69.38 बिलियन डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण भारत द्वारा चीनी सामानों, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल कच्चे माल पर अत्यधिक निर्भरता है। जहां भारत मुख्य रूप से कच्चे माल और प्राथमिक वस्तुओं का निर्यात करता है, वहीं चीन से तैयार और उच्च तकनीक वाले उत्पादों का भारी मात्रा में आयात किया जाता है।

भारत सरकार इस बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने और घरेलू उद्योगों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाना है, ताकि द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाया जा सके।

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