टाटा परिवार भारत का सबसे अमीर घराना क्यों नहीं है?
जब भी भारत के सबसे बड़े और भरोसेमंद बिजनेस घरानों की बात होती है, तो टाटा ग्रुप का नाम सबसे पहले आता है। टीसीएस, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील जैसे कई मशहूर ब्रांड्स आज हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा हैं। इसके बावजूद, जब भारत या दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची आती है, तो टाटा परिवार का कोई भी सदस्य उसमें शीर्ष पर दिखाई नहीं देता। इसका कारण यह है कि टाटा परिवार के सदस्य कंपनी के पूर्ण मालिक नहीं हैं, बल्कि वे एक ट्रस्ट आधारित व्यवस्था के तहत काम करते हैं।
टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा परिवार के संस्थापकों और पूर्वजों ने अपनी व्यक्तिगत संपत्ति का बड़ा हिस्सा दान में देकर इन परोपकारी ट्रस्टों की नींव रखी थी। इसका नतीजा यह है कि टाटा ग्रुप की कंपनियों से होने वाली कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति बनने के बजाय सीधे समाज सेवा और जनकल्याणकारी कार्यों में जाता है।
इसी दूरदर्शी और परोपकारी सोच की बदौलत टाटा ग्रुप ने भारत में कई वर्ल्ड क्लास कॉलेज, शोध संस्थान और अस्पताल बनवाए हैं। इनमें टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। यही वजह है कि धन-दौलत के व्यक्तिगत आंकड़ों में सबसे अमीर न होते हुए भी, टाटा परिवार देशवासियों के दिलों में सबसे सम्मानित स्थान रखता है।
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