सच्चा मित्र कौन है?
अक्सर हम अपने जीवन में दोस्तों की तलाश करते हैं। सुख-दुख बांटने के लिए हमें किसी न किसी के साथ की जरूरत होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस पूरी दुनिया में सबसे अच्छा और सच्चा दोस्त कौन है? जब जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा होता है, तो हमारे पास मित्रों और शुभचिंतकों की कोई कमी नहीं होती।
परंतु, इंसान के जीवन में कभी-कभी ऐसा कठिन समय भी आता है जब उसकी परिस्थितियां पूरी तरह बदल जाती हैं। उस मुश्किल दौर में कभी धन काम नहीं आता, तो कभी सगे-संबंधी और मित्र भी पीछे हट जाते हैं। यहाँ तक कि इंसान का अपना शरीर और उसकी बुद्धि भी उसका साथ छोड़ देती है। ऐसे निराशाजनक समय में, जब चारों तरफ अंधेरा दिखने लगता है, तब केवल ईश्वर ही मनुष्य की सच्ची मदद करता है।
जब व्यक्ति हर तरफ से हार जाता है और सारे रास्ते बंद नजर आते हैं, तब वह अनजाने में ही सही, उस परमशक्ति को याद करता है। उसके मुख से अनायास ही निकल पड़ता है—"हे प्रभु! अब तो बस तेरा ही सहारा है।" ईश्वर की मित्रता निस्वार्थ होती है। वह कभी आपका साथ नहीं छोड़ता, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। इसलिए, संसार के रिश्तों को निभाते हुए उस सर्वोच्च शक्ति पर विश्वास रखना ही जीवन का सबसे बड़ा संबल है।
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