देवता कहाँ रहते हैं?

सदियों से मानव सभ्यता इस रहस्य को सुलझाने में लगी है कि दिव्य शक्तियाँ या देवता वास्तव में कहाँ निवास करते हैं। कुछ लोग उन्हें आसमान की ऊंचाइयों में ढूंढते हैं, तो कुछ पवित्र पर्वतों या प्राचीन मंदिरों में। लेकिन यदि हम गहरे चिंतन और अध्यात्म के दृष्टिकोण से देखें, तो देवताओं का वास्तविक निवास स्थान मनुष्य का अंतर्मन ही है।

इस पूरे ब्रह्मांड या बाहरी अस्तित्व में आप चाहे कहीं भी चले जाएं, भौतिक रूप से आपको ईश्वर या देवता कहीं नहीं मिलेंगे। असल में, जब कोई व्यक्ति ध्यान या आत्म-निरीक्षण के माध्यम से अपने अवचेतन मन (Subconscious Mind) की गहराइयों में उतरता है, तब बाहरी दुनिया का कोलाहल शांत होने लगता है। उस परम शांति में शब्द पूरी तरह से गायब हो जाते हैं और मन के विचार भी विलीन हो जाते हैं।

शब्दों और विचारों के समाप्त होने के बाद वहाँ केवल चित्रों, प्रतीकों और अनूठे अनुभवों की एक नई दुनिया सामने आती है। यही वह सूक्ष्म धरातल है जहाँ हमारी चेतना उच्च आयामों को छूती है। हमारी आस्था, करुणा, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा ही हमारे भीतर देवताओं के रूप में प्रकट होती है। संक्षेप में कहें तो, देवता हमारे बाहर कहीं नहीं, बल्कि हमारे ही भीतर छिपे उस असीम और शुद्ध आत्म-तत्व का नाम हैं, जिसे पहचानने के लिए बस अंतर्मुखी होने की आवश्यकता है।

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