दादी माँ की ममता की मिट्टी
शिवप्रसाद सिंह की कहानी दादी माँ बचपन की सादगी और पारिवारिक स्नेह की एक खूबसूरत झलक पेश करती है। कहानी में एक छोटे बच्चे के माध्यम से दादी माँ के प्रति अटूट लगाव को दिखाया गया है।
एक दृश्य में, लेखक नहाकर लौटता है तो दादी माँ उसके लिए कुछ खास लेकर आती हैं। वे उसे चबूतरे की मिट्टी देती हैं। यह कोई सामान्य मिट्टी नहीं है – बच्चे के लिए यह प्यार का प्रतीक है। दादी माँ का यह सरल उपहार उनकी गहरी समझ और बच्चे के मन की नाजुक भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
मिट्टी से खेलना बच्चों के लिए स्वाभाविक है। दादी माँ इसे जानती हैं। वे समझती हैं कि खेल-खेल में बच्चा संसार को जानता है। यही कारण है कि वे उसकी जिज्ञासा को पहचानकर उसके लिए चबूतरे की मिट्टी लाती हैं।
इस छोटे से पल में दादी माँ की ममता, समझदारी और बच्चे के प्रति अपार प्रेम झलकता है। आज के व्यस्त युग में, ऐसी सादगी भरी यादें हमें जीवन की असली खुशियों की ओर
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