पति-पत्नी के अधिकार: समानता और सम्मान का आधार
शादी के बंधन में जुड़े हर व्यक्ति के कुछ आपसी और कानूनी अधिकार होते हैं। पति का अपनी पत्नी पर कोई "अधिकार" ऐसा नहीं है जो उसे उसके ऊपर शासन करने की इजाज़त दे। बल्कि, भारतीय कानून के तहत दोनों के अधिकार लगभग समान हैं।
पत्नी के कई महत्वपूर्ण अधिकार कानून द्वारा सुरक्षित हैं। उदाहरण के लिए, वह स्त्रीधन – जैसे तोहफे, गहने या उपहार – पर पूर्ण अधिकार रखती है। इसे उसके पति या सास-ससुर किसी को भी छीनने का अधिकार नहीं होता।
पति के घर में रहने का अधिकार भी पत्नी के लिए महत्वपूर्ण है। कानून कहता है कि पति उसे घर से बाहर नहीं निकाल सकता। अगर वह ऐसा करता है, तो पत्नी आर्थिक सहायता या फिर से घर में वापसी के लिए कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
इसी तरह, रखरखाव यानी रहन-सहन का अधिकार भी उसे मिला है। अगर पति आर्थिक रूप से सहायता नहीं देता, तो पत्नी कोर्ट के माध्यम से भरण-भरण की मांग कर सकती है।
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