परमेश्वर का डर: भय या श्रद्धा?
कई बार लोग परमेश्वर के डर को उस तरह के भय से जोड़ देते हैं जो किसी खतरनाक व्यक्ति या क्रूर स्वामी के प्रति होता है। लेकिन ऐसा डर वास्तविक धार्मिक भावना नहीं है। परमेश्वर का डर मतलब सिर्फ इस बात से डरना नहीं कि वह कहीं दंड न दे दे, बल्कि यह है कि उसकी महिमा, न्याय और पवित्रता के सामने अपनी कमजोरी और सीमाओं को महसूस करना।
यह डर उस दास की तरह नहीं है जो अपने क्रूर स्वामी से कांपता है, बल्कि उस बच्चे की तरह है जो अपने पिता के सम्मान में झुकता है। यह डर डरावने स्वरूप के कारण नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और जिम्मेदारी के कारण होता है।
हिंदू धर्म में भी कहा गया है – “यत्र विघ्नं तत्र निर्वाणम्”, यानी जहां भय है, वहां मुक्ति नहीं। असली भक्ति में डर नहीं, बल्कि विनम्रता होती है। परमेश्वर का डर मानना मतलब यह जानना कि वह सब कुछ देख रहा है, और इसलिए गलत काम करने से बचना। यह डर नहीं, एक आंतरिक चेतना है जो हमें सही र
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