पहला कुरान किसने लिखा था?

इस्लामी परंपरा के अनुसार, पवित्र कुरान किसी एक व्यक्ति द्वारा लिखित किताब नहीं है, बल्कि यह ईश्वर (अल्लाह) का संदेश है जो फरिश्ते जिब्राइल के माध्यम से पैगंबर मोहम्मद पर प्रकट हुआ था। पैगंबर मोहम्मद स्वयं पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे, इसलिए जब भी उन पर कोई आयत नाजिल (प्रकट) होती, वे अपने साथियों (साहबा) को उसे सुनाते थे।

पैगंबर मोहम्मद के जीवनकाल में उनके प्रमुख सहयोगियों, जिन्हें कातिब-ए-वही (रेवलेशंस के लेखक) कहा जाता था, ने इन आयतों को खजूर के पत्तों, चमड़े, पत्थरों और हड्डियों पर लिखा। इनमें जैद बिन साबित (Zayd ibn Thabit), हजरत अली, उस्मान बिन अफ़्फ़ान और उबई बिन काब जैसे नाम मुख्य थे।

पैगंबर मोहम्मद के निधन के बाद, पहले खलीफा हजरत अबू बक्र के शासनकाल में कुरान की सभी बिखरी हुई प्रतियों को एक पुस्तक का रूप देने का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ। उन्होंने जैद बिन साबित को इस जिम्मेदारी का नेतृत्व सौंपा। इसके बाद तीसरे खलीफा हजरत उस्मान के दौर में इसका एक प्रामाणिक मानक संस्करण (मुसहाफ़) तैयार कराकर विभिन्न क्षेत्रों में भेजा गया, जिसे आज उस्मानी नुस्खा कहा जाता है।

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