पुरुष बांझपन: क्या उम्र के साथ बढ़ती है परेशानी?
आम धारणा है कि बांझपन सिर्फ महिलाओं की समस्या है, लेकिन सच तो यह है कि पुरुष भी उम्र बढ़ने के साथ प्रजनन क्षमता में कमी महसूस करते हैं। 35 से 40 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों में शुक्राणु की गुणवत्ता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। इसका सबसे सीधा असर गर्भधारण की दर पर पड़ता है।
शुक्राणु की संख्या और गतिशीलता उम्र के साथ कम होती जाती है। शोध बताते हैं कि पुरुष अपने शुरुआती 30 के दशक से ही धीमी गति से प्रजनन क्षमता खोने लगते हैं। मध्य और लगभग 38-40 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते यह कमी लगभग 52% तक पहुंच जाती है।
इसका मतलब यह नहीं कि 40 के बाद पिता नहीं बना जा सकता, लेकिन गर्भधारण में समय अधिक लग सकता है या फिर कई बार चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। यहां तक कि बच्चे के स्वास्थ्य पर भी पिता की उम्र का प्रभाव पड़ सकता है।
इसलिए, अगर आप और आपकी पार्टनर प्रजनन की योजना बना रहे हैं, तो उम्र को नजरअंदाज
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।