पृथ्वी का सबसे बुद्धिमान प्राणी: चिंपैंजी

सदियों से इंसान यह मानता आया है कि सोचने और समझने की क्षमता केवल उसी के पास है। लेकिन आधुनिक विज्ञान और पशु संज्ञान (animal cognition) के अध्ययनों ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। जब बात इंसानों के बाद पृथ्वी पर सबसे बुद्धिमान प्राणी की आती है, तो चिंपैंजी का नाम सबसे ऊपर आता है।

चिंपैंजी इंसानों के सबसे करीबी रिश्तेदार माने जाते हैं, और उनका डीएनए हमसे लगभग 98% मिलता है। यही वजह है कि उनकी मानसिक क्षमताएं अद्भुत होती हैं। वे न केवल समस्याओं को हल करने में माहिर होते हैं, बल्कि वे औजारों का निर्माण और उनका उपयोग भी बखूबी करते हैं। उदाहरण के लिए, वे दीमकों को पकड़ने के लिए लकड़ी की टहनियों को एक औजार की तरह इस्तेमाल करते हैं और पत्थरों से सख्त अखरोट तोड़ते हैं।

पशु संज्ञान के अंतर्गत केवल चिंपैंजी ही नहीं, बल्कि कीटों से लेकर अन्य जीवों के सीखने की क्षमता (conditioning and learning) का भी अध्ययन किया जाता है। तुलनात्मक मनोविज्ञान (comparative psychology) से विकसित हुए इस क्षेत्र ने यह साबित किया है कि चिंपैंजी में भावनाएं, सामाजिक जुड़ाव और याददाश्त बहुत मजबूत होती है। वे आपस में बातचीत करने के लिए खास तरह के इशारों और आवाजों का इस्तेमाल करते हैं। यहां तक कि कुछ चिंपैंजियों ने इंसानी सांकेतिक भाषा (sign language) को भी बड़ी आसानी से सीख लिया है।

संक्षेप में कहें तो, चिंपैंजी का व्यवहार और उनकी बुद्धिमत्ता हमें यह याद दिलाती है कि प्रकृति में समझदारी केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवों के पास भी अपना एक समृद्ध मानसिक संसार होता है।

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