प्राण और आत्मा में अंतर क्या है?

प्राण और आत्मा दोनों शब्द अक्सर साथ-साथ सुनाई देते हैं, लेकिन इनका अर्थ बहुत अलग है। आत्मा वह शुद्ध चेतना है, जो न तो पैदा होती है और न नष्ट होती है। वह निराकार, निर्गुण और सर्वव्यापी है। यही वह अमर सत्ता है जो जन्म-मृत्यु के चक्र से परे है।

दूसरी ओर, प्राण शरीर के लिए ऊर्जा का स्रोत है। ये पांच प्रकार के होते हैं—प्राण, अपान, व्यान, उदान और समान। ये स्थूल शरीर के अंग हैं और श्वास, पाचन, संचलन जैसी सभी क्रियाओं को संचालित करते हैं। बिना प्राणों के शरीर एक निर्जीव ढेर की तरह होता है।

एक तरह से कहें तो, आत्मा वह दीपक की तरह है जो स्वयं प्रकाश है, जबकि प्राण उस प्रकाश को फैलाने वाली लपट की तरह। आत्मा चेतना का मूल है, लेकिन प्राण उस चेतना को शरीर तक पहुँचाने का माध्यम बनते हैं।

जैसे बिजली बिना तार के उपकरणों तक नहीं पहुँच सकती, वैसे ही आत्मा की चेतना प्राणों के माध्यम से ही सूक्ष्म, कारण और स्थू

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