बेटी के घर का खाना क्यों नहीं खाना चाहिए?

कई पुराने रिवाजों में एक मान्यता थी कि बेटी के माता-पिता को उसके ससुराल में खाना नहीं खाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पुराने जमाने में बेटी को "दान" माना जाता था — यानी एक बार देने के बाद उसके नए घर के प्रति उसका सारा बंधन हो जाता था। दान में दी गई बेटी के घर की किसी चीज पर माता-पिता का अधिकार नहीं माना जाता था।

इसी तर्क से कई परिवारों में यह रिवाज चला कि बेटी के घर का खाना, यहां तक कि पानी भी माता-पिता नहीं पीते थे। ऐसा करने से उन्हें अपनी स्थिति और नियमों का सम्मान करते हुए देखा जाता था।

लेकिन आज के समय में यह विचार लगभग खत्म हो चुका है। आधुनिक परिवारों में बेटी के घर का खाना खाना स्वाभाविक है। माता-पिता बेटी के घर आराम से आते-जाते हैं, खाते-पीते हैं, और उनके साथ जुड़े रहते हैं।

रिवाज बदल गए हैं, और भावनाओं ने नियमों को पीछे छोड़ दिया है। आज बेटी का घर पिताजी के लिए भी उतना ही सुखद स्थान ह

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