बेटे को सुधारने से पहले उसकी बात सुनें

अक्सर माता-पिता को लगता है कि बच्चे को सुधारने के लिए डांटना, डराना या जबरदस्ती करना जरूरी है। लेकिन ऐसा करने से अक्सर उल्टा असर होता है। बच्चे की बात ध्यान से सुनना, उसे समझना और उसकी भावनाओं को महत्व देना, असली सुधार की पहली सीढ़ी है।

हर बच्चे के मन में यह भावना होती है कि वह अपनी बात कहना चाहता है, लेकिन माता-पिता ज्यादातर सुनते नहीं। जब बच्चा महसूस करता है कि उसकी बात कोई नहीं सुन रहा, तो वह जिद्दी और दूर होने लगता है। जरूरत से ज्यादा डांटना या लगातार दोष देना उसके आत्मविश्वास को तोड़ देता है।

सच्चा बदलाव तभी आता है जब बच्चा महसूस करे कि उसके माता-पिता उसे प्यार करते हैं, उसकी बात सुनते हैं और उसकी तरफ से देख रहे हैं। इसलिए, बेटे को सुधारने के लिए पहला कदम यही होना चाहिए कि उसके पास बैठें, उसकी बात धैर्य से सुनें और बिना डराए समझाएं।

याद रखें, प्यार और समझ से बड़ा क

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