माता-पिता से बड़ा कौन?
हम अक्सर सोचते हैं कि भगवान से बड़ा कौन हो सकता है? लेकिन एक प्राचीन सत्य यह है कि माता-पिता का स्थान सभी से ऊपर है। धर्मग्रंथों में स्पष्ट कहा गया है — सबसे बड़ा तो भगवान है, लेकिन भगवान से भी बड़ा गुरु माना जाता है। गुरु से बड़ा पिता और पिता से भी बड़ी मां की जगह होती है।
मां का स्थान सर्वोच्च है — यह बात कथा व्यास भी बताते हैं। वे शास्त्रों की व्याख्या करते हुए कहते हैं कि मां वह प्रथम शक्ति है जो बच्चे को जीवन देती है, उसे पालती है और अपने प्रेम से उसका चरित्र गढ़ती है। पिता का स्थान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे मार्गदर्शन करते हैं, सहारा देते हैं और जीवन के संकटों में ढाल बन जाते हैं।इसलिए जब कोई पूछे कि भगवान से बड़ा कौन है, तो उत्तर सरल है — माता-पिता। वे भगवान के रूप में हमारे जीवन में आते हैं। उनका आशीर्वाद ही सच्चा संपत्ति है। उनके बिना जीवन अधूरा है। इसलिए, उनका सम्मान करना, उनकी सेवा करना और उनके
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